11/27/19

Hindi Poem On Sarswati Mata [ एक अधिकार दे दो माँ ]

Hindi Poem On Sarswati Mata एक अधिकार दे दो माँ


मेरे भी लेखनी पर बस यही उपकार कर दे माँ
सभा में बोलने का भी जरा अधिकार दे दो माँ
दिखा दू इस जमाने को मेरे अंदर है जो ताकत
मेरे अंदर के हिम्मत को जरा सत्कार दे दे मां

         मेरे भी लेखनी पर बस यही उपकार कर दे मां
उठा लूं लेखनी को जब तभी मैं कुछ नया कर दूं
हो शब्दों में सर इतना की ताकत में नया भर दूं
कलम के हरकतों का तुम मुझे संसार दे दो मां

मेरे जीवन में तुम बनकर कलम अवतार ले लो मां
        मेरे भी लेखनी पर बस यही उपकार कर दे मां
सिपाही हूं कलम का मैं तेरे चरणों में आया हूं
बना के शब्दों की माला तुझे अर्पण को लाया हूं

कि इस बालक विनती को जरा स्वीकार कर ले मां
के शब्दों से मेरा अब तुम जरा भंडार भर दे मां
         मेरे भी लेखनी पर बस यही उपकार कर दे मां

---------जय हिन्द दोस्तों --------



लेखक - मनीष कुमार तिवारी 

Post a Comment