Saturday, November 30, 2019

Hindi Poem On Smoke By A Indian Soldier 2020

Hindi Poem On Smoke

Hindi Poem On Smoke
Hindi Poem On Smoke

कुछ तो हुवा है ये कैसा धुवा है ? 
है काली सी छाया  ये क्या कह रहा है ?
चलते डगर में इस मन के भवर में
सवालो का सागर उमड़ सा रहा है

कुछ तो हुवा है ये कैसा धुंआ है?
क्या तपती अनल पर  जल गिर गया है ?
या अंगारो का कारवां थम गया है ?

ये कैसा फलन है ? ये क्या हो रहा है ?
कुछ तो हुवा है ये कैसा धुंआ है ?
क्या ये देव भूमि ,की पुण्यं की  धुंआ है?
या वैद्यो की बूटी, की चर्चित दवा है?

या जीवन को पल भर में कर दे जी कुंठित  
क्या ये धूम्र दंडी की विषयुक्त हवा है ?
कुछ तो हुवा है ये कैसा धुंआ है ?

हवा की सुगमता हृदय की विरलता
जगह चाहे जो हो कही पर है मिलता
धुंआ में है अद्भुत गज़ब की कुशलता

क्या अम्बर से धरती को ये जोड़ रहा है ?
क्या है ये विफलता या है ये सफलता
सवालो का सागर उमड़ से रहा है
कुछ तो हुवा है ये कैसा धुंआ है ?

--------------जय हिन्द दोस्तों --------------


कवि :- मनीष कुमार तिवारी

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