Wednesday, December 11, 2019

Hindi Poem On Mother With Son माँ तेरी आँचल की छाँया में गीत सुहाने गाउ क्या..

माँ तेरी आँचल की छाँया में  गीत सुहाने गाउ क्या


नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है इस नए वेबसाइट www.shayarisangam.com में, आज फिर लेकर आया हूं एक और बड़ी ही सुनहरी कविता जो एक जांबाज जवान ने लिखा है यह कविता मां और बेटे के प्रेम को दर्शाता है, दरअसल सभी जानते हैं किस दुनिया में माँ का दर्जा कहीं भगवान से भी ऊपर है, माँ वह संपत्ति है जिसकी तुलना इस संसार के किसी वस्तु से नहीं की जा सकती | इसलिए हम सबको माता-पिता का दिल से कदर करना चाहिए और उनको हमेशा खुश रखना चाहिए | तो चलिए देखते हैं कविता में क्या लिखा है उस जांबाज सैनिक ने 
माँ तेरी आँचल की छाँया में
गीत सुहाने गाउ क्या ?
अपनी हर शब्दों मे मैं  
ममता तेरी सजाऊ क्या ?
माँ मै कवि बन जाऊं क्या?

मैं लिखकर के भाव समर्पण
गर्व से जब भी देखूं दर्पण
माँ मैं तुझमे खुद को पाकर
अपने भाग्य पर इठलाऊँ क्या ?
माँ मै कवि बन जाऊं क्या?

आसान डगर हो जाएगा
कोई डर न हमे सताएगा
परिणाम की चिंता किये बिना
मैं सच ही लिखता जाऊं क्या
माँ मै कवि बन जाऊं क्या ?
माँ मै कवि बन जाऊं क्या ?

मातृ भक्ति की बहती गंगा
लेकर के मैं हाथ तिरंगा
ममता की सरिता में मैं 
लेखनी संग नहाऊं क्या?
माँ मै कवि बन जाऊं क्या ?

माँ है मस्जिद , माँ हैं मन्दिर 
हर देव-देवी हैं माँ के अंदर
माँ की उपमा बस माँ है
सबको यही  बताऊ क्या?
माँ मै कवि बन जाऊं क्या ?
तेरी आँचल की छाँया में
गीत सुहाने गाउ क्या ?

कैसी लगी यह कविता कमेंट में लिखकर जरूर बताइए और अपने दोस्तों के पास जल्दी से जल्दी शेयर कीजिए हो सकता है कोई दोस्त अपनी मां की प्यार को नहीं समझता हो इस कविता को पढ़ने के बाद शायद उसके भी दिल में मां के प्रति थोड़ी प्यार जग जाए

---- जय हिन्द ----

कवि:-मनीष कुमार तिवारी


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