12/2/19

Poem On Mother And An Army Soldier # फौजी बोला अपनी मां से आंसू लेकर आंखों में #

 फौजी बोला अपनी मां से आंसू लेकर आंखों में 


फौजी बोला अपनी मां से आंसू लेकर आंखों में
एक निवाला आज खिला दे मां तू अपने हाथों से
सारी दुनिया में भूल जाऊं जब आऊं तेरे आंचल में
तेरी आंचल का सुकून नहीं मिलता मुझे हिमाचल मे

   माँ तू आज मुझको नहला दे अपनी ममता के सावन से
     एक निवाला आज खिला दे मां तू अपने हाथों से 
      अजीब खुशी मुझे मिलती है जब बेटा कह कर बुलाती है  
      अपने हाथों से मेरे सर को जब तू सहलाती है  
    ऐसा लगता है जैसे मां तू दिया तू ही बाती है 

        फिर से मुझे उजाला दे दे छुपा ले अपने आंचल से  
        एक निवाला आज खिला दे मां तू अपने हाथों से 
      तेरी ममता की दो घूंट में फिर से पीने आया हूं 
        तेरी गोद में अपना मैं बचपन जीने आया हूं  

      तेरी आंचल की छाया मैया कितना मनभावन है 
    तेरी चरणों की धूल तो सारे जग में पावन है 
         एक बार फिर मुझे सुला दे थपकी दे इन हाथों से
         एक निवाला आज खिला दे मां तू अपने हाथों से

      भारत माता की सेवा में दिन रात में रहता हूं 
       पर तेरी खातिर मैया मैं बस इतना ही कहता हूं
          तूने मुझको जन्म दिया और बढ़ा हुआ तेरे पालन से 

     -----जय हिन्द जय भारत-----

कवि:- मनीष कुमार तिवारी 










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