Sunday, April 12, 2020

Best Poems Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

नमस्कार मेरे प्यारे दोस्तोंमैं विकास आज आप लोगों के लिए एक ऐसी कविता लेकर आया हूं | कविता का शीर्षक है Jawan Ki Beti जिसमें सरहद पर तैनात एक सैनिक और घर पर इंतजार कर रही उसकी छोटी सी, प्यारी सी, नन्हीं सी बेटी, के मन की भावना को प्रकट किया गया है इस कविता मेंइस कविता Jawan Ki Beti के रचनाकार एक फौजी है जिसका नाम  मनीष कुमार तिवारी (मनी टैंगो) बिहार आरा जिला के रहने वाले हैं | इस कविता के में उन्होंने पितृ भावना के साथ-साथ देश के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाने की कोशिश की है  कविता के  एक-एक लाइन में ऐसी भावना को पिरोया है कि आखो में आंसू आ जाएंगे | लेखक हमारे देश के एक उभरते हुए बहुत ही कम उम्र के कवि भी है | जिन्होंने अपनी रचना के माध्यम से कई मंचो पर सम्मानित होने के स्टब साथ आप सब के दिल मे भी जगह बनाने की बेजोड़ कोशिश कर रहे है और इनका सपना भारत के साथ साथ पूरे दुनिया मे अपनी कविताओं का छाप छोड़ना । तो आइए पढ़ते हैं इनकी कविता को.....

Jawan Ki Beti

Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

शांत चित चिलमन पर बैठी 
अरमानो की जोत जलाती 
ठंढी ठंढी हवा से खेले
परियो जैसी वो मुसकाती 
अपने आखो के सपनो को 
सरहद तक कैसे पहुचाती 
अपने पिता से दूर रहकर 
कैसे रहती जवान की बेटी


Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

छोटे छोटे कदमो से वो 
दरवाजे पे दौड़कर जाती 
अपने पिता को जो ना पाए 
थोड़ा सा मायूस हो जाती 
लिपट के माँ के सीने से   
बिलख-बिलख के खूब रोती 
अपने पिता से दूर रहकर 
कैसे रहती जवान की बेटी


Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

बिन पापा के मनाई होली
दीपावली में भी घर ना आये 
देखते-देखते बिता दशहरा 
बैठी थी वह आस लगाए
कोई तो मेरे बातो को 
जाकर पापा तक पहुचाये
अपने पिता से दूर रहकर 
कैसे रहती जवान की बेटी

Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari


अब तो घर आ जाओ पापा 
तुझे पुकारे तेरी बेटी
कुछ पल मेरे साथ बिता लो 
तुझसे मेरी यही है बिनती
अपने पिता से दूर रहकर 
कैसे है रहती जवान की बेटी



जाते हुए जो किये थे वादा
अब तो उसे निभा दो पापा
आकर अपने हाथों से  
सर को मेरे सहला दो पापा
एक बार कंधे पे लेकर 
मेला मुझे घूमा दो पापा
जय हिंद जय हिंद मैं भी बोलू 
आकर मुझको सीखा दो पापा

Jawan Ki Beti By Manish kumar Tiwari

खाना कोई अच्छा न लगता 
मम्मी चाहे जो भी देती
अपने हाथों से  पापा  
आकर आज खिला दो तुम रोटी
अपने पिता से दूर रहकर 
कैसे है रहती जवान की बेटी
अपने पिता से दूर क्यों रहकर 
जिति है जवान की बेटी


  1. नज़रे करम मुझ पर इतना न कर,
    की तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं,
    मुझे इतना न पिला इश्क़-ए-जाम की,
    मैं इश्क़ के जहर का आदि हो जाऊं।

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